दास्तां

न तहक़ीकात के मुश्किल सवालों के जवाबों में ।। न तहरीरों में , दस्तावेजों में , ना तो हिसाबों […]

परिंदा

जबसे तूने कर दिया हमको नज़र अंदाज़ हम , इक परिंदा होके भूले जाऍं सच परवाज़ हम ।। जी […]

अपनी पीड़ाऍं

अपनी पीड़ाऍं किसी को मत बताना ।। शोक में तो बन विदूषक खिलखिलाना ।। लोग उड़ाते हैं हॅंसी दुखियों […]

ग़म

उससे बिछड़े यों कई साल हुए जाते थे , उससे दूरी का मगर सख़्त अभी भी ग़म था ।। […]

तालीम

हसीनों की मोहब्बत ने तुम्हें पूरा मिटाया है ।। हैं हम जो कुछ , उन्हीं की बेवफाई ने बनाया […]