सन्डे हो या मंडे खाओ मुर्गा मछली अंडे

पौर्वात्य  शिष्टाचार कहता है कि हमें किसी व्यक्ति के खाने पीने की बुराई नहीं करना चाहिए ।  अतः सभ्य होने के नाते हमें चाहिए कि हम माँस भक्षियों के आगे मुर्गा मटन की अथवा सुरा प्रेमियों के सामने शराब की...Read more

इसे पढ़ना सख्त मना है !

क्योंकि आजकल सभी बचपन से ही ‘ जाकी ‘ के जांगिये पहनने लगे हैं ( और अब तो  पहलवान भी लंगोटी कि जगह सपोर्टर पहनकर डंड पेलते हैं ) अतः मस्तराम को मैं अपना लंगोटिया  यार नहीं बल्कि जांगिया दोस्त कहूँगा। वो मेरा  बेस्ट फ्रैंड है और अपने...Read more

■ शीर्षक में क्या धरा है ?

शीर्षक ! शीर्षक ! शीर्षक ! आख़िर क्या धरा है शीर्षक में ?अरे जनाब शीर्षक में ही तो सब कुछ धरा है। मुखड़ा ही सुन्दर न होगा तो अंतरा कौन सुनेगा ?चेहरा ही सुन्दर न होगा तो जुगराफिया कौन निहारेगा...Read more