कविता : मौत का वक़्त

जब हम हँस रहे हों किन्तु फूहड़ कामेडी देखकर अथवा भद्दा चुटकुला सुनकर नहीं बल्कि हम खुश हों संतुष्ट  हों यह जानकर अथवा समझकर भले ही वह झूठ हो कि हमने पूरे कर लिए हैं वे कर्तव्य निभा डाली हैं...Read more

मुक्तक : 15 – तमगे तो हमें

तमगे तो हमे एक नहीं चार मिले हैं ।। इक बार नहीं चार चार बार मिले हैं ।। चुन चुन के ऊँची-ऊँची डिग्रियों के वास्ते , अब तक मगर न कोई रोज़गार मिले हैं ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more

मुक्तक : 14 – यों मुँह पे करता

यों मुँह पे करता मीठी , हर बात वो आकर ।। पर पीठ पीछे करता , उत्पात वो आकर ।। मिल बैठ कैसे होगा , इस मसले का हल तब , करता है घात पर जब , प्रतिघात वो आकर ? -डॉ....Read more

कविता : अगर तुझे कवि बनना है

कविता के लिए विषय ढूँढना / निशानी नहीं है / कवि होने की / कविता तो परिभाषित है / कवि कर्म रूप में / फिर क्यों इतनी परवाह विषय की / प्रेरणाओं के तत्वों की / कविता लिखने का संकल्प...Read more

23. ग़ज़ल : इस कदर नीचता नंगपन

 इस क़दर नीचता नंगपन छोड़ दो।। लूटलो सब कमजकम कफ़न छोड़ दो।। इसमें रहकर इसी की बुराई करें , ऐसे लोगों हमारा वतन छोड़ दो।। हो बियाबान के दुश्मनों रहम कुछ , यूँँ लहकते-महकते चमन छोड़ दो।। उनकी ख़ातिर जो चिथड़े लपेटे फिरें , एक दो क़ीमती पैरहन  छोड़...Read more

22 : ग़ज़ल – रहने दो सबको अपने

रहने दो सबको अपने अपने मुगालतों में ।। जो ख़्वाबों में मज़ा है , क्या है हक़ीक़तों में ?1।। नाँ चाहकर भी अच्छा , अच्छाई भूल जाये , ऐ नाज़नींं न ऐसे पेश आ तू खल्वतों में ।।2।। अच्छाई पर भी...Read more