मस्त हो आज तो ख़ुम भर , शराब पीना है ।।

जाके मैख़ाने नहीं घर , शराब पीना है ।।

हर किसी ग़म की दवा जाम ही अगर है तो ,

हमको बोतल ही उठाकर , शराब पीना है ।।

दुनिया कहती है बुरा ही शराबनोशी को ,

इसलिए छुप के सही पर , शराब पीना है ।।

जौ की , अंगूर की , महुए की , कच्ची या पक्की ,

आज़माइश के लिए हर , शराब पीना है ।।

फ़ाख़्ता होश न फिर लौट के चले आएँ  ,

इसलिए मुझको बराबर , शराब पीना है ।।

जाम का दौर चले शाम से जो शब भर भी ,

मुँह सुबह होते ही धोकर , शराब पीना है ।।

लोग ले नाम ख़ुदा-रब का ज़ह्र पी जाते ,

हमको अल्लाह-ओ-अक़बर , शराब पीना है ।।

इक ग़ुज़ारिश है अगर आपकी इजाज़त हो ,

आपके साथ बिरादर , शराब पीना है ।।

क्यूँ पियाले को लगाते हो मुँह से चम्मच लो ,

तुमको मानिंदे दवा गर , शराब पीना है ।।

आज के बाद न होठों से फिर लगाऊँगा ,

आज सिर पर ये क़सम धर , शराब पीना है ।।

  -डॉ. हीरालाल प्रजापति

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