जूलियट सी , हीर सी , लैला के जैसी प्रेमिका ।।

इस ज़माने में कहाँ पाओगे ऎसी प्रेमिका ।।

क़समोंं वादों पर यक़ीं यूँ ही नहीं करती कभी ,

है चतुर, चालाक, ज्ञानी आजकल की प्रेमिका ।।

बच नहीं सकता है अब आशिक़ बहाने से किसी ,

जिससे करती प्यार करती उससे शादी प्रेमिका ।।

बेवफ़ा आशिक़ को अब माफ़ी न देती दोस्तों ,

अब सबक सिखला के बदला खूब लेती प्रेमिका ।।

एक आशिक़ छोड़ दे तो ख़ुदकुशी करती नहीं ,

दूसरे से इश्क़ को तैयार रहती प्रेमिका ।।

पहले आशिक़ कि नज़र से देखती थी ये जहाँ ,

अब तो चील और गिद्ध जैसी आँख रखती प्रेमिका ।।

इश्क़ में जिस्मों के रिश्तों को भी देती अहमियत ,

अब न दक़्यानूस , शर्मीली न छुई-मुई प्रेमिका ।।

अब तो मुँँह बोले बहन-भाई पे शक़ लाज़िम हुआ ,

कितने ही तफ़्तीश में निकले हैं प्रेमी प्रेमिका ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

This article has 2 comments

  1. Sunil Sharma Reply

    वाह वाह क्या बात हैं।
    डॉ.साहब..💐💐👍

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