किसी बात का कब बुरा मानता हूँ  ।।

तुझे तो मैं अपना  ख़ुदा मानता हूँ ।।1।।

मेरी कामयाबी का क्या राज़ खोलूँ ,

इसे तो मैं तेरी दुआ मानता हूँ ।।2।।

मेरा तू जो चाहे वो हँसकर उठाले ,

मेरा तो मैं सब कुछ तेरा मानता हूँ ।।3।।

जो मैं चाहता हूँ वो सब कुछ है तुझमें ,

तुझे अपनी ख़ातिर बना मानता हूँ ।।4।।

नया कुछ नहीं है तेरा मेरा मिलना ,

ये जन्मों का मैं सिलसिला मानता हूँ ।।5।।

भले दूर से दूर भी तू है लेकिन ,

मैं कब ख़ुद को तुझसे जुदा मानता हूँ ।।6।।

मिलो मत मिलो इसकी पर्वा करूँ कब ,

दिल-ओ-जाँ तुझे जब दिया मानता हूँ ।।7।।

तेरी बेनियाज़ी को तेरी क़सम है ,

मैं पर्वा की ही इंतिहा मानता हूँ ।।8।।

( बेनियाज़ी=उपेक्षा )

 -डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *