जिसका रब चाहे अगर , धड़ का बना देना सर ।।

वो अतल से भी उबर , आता है चलकर ऊपर ।।

गर न मर्ज़ी हो ख़ुदा , की तो परों के होते ,

तैर मछली न सके , उड़ न सके खग फर-फर ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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