सर्दियों में ज्यों सुलगती लकड़ियाँ अच्छी लगें ॥

जैसे हँसती खिलखिलाती लड़कियाँ अच्छी लगें ॥

मुझको मौसम कोई हो जलता-जमाता-भीगता ,

बंद कमरे की खुली सब खिड़कियाँ अच्छी लगें ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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