क़िस्सों में ही सुस्त गधे से जीत न पाता अरबी घोड़ा ।।

बस गप्पों में ही कछुए से तेज़ कभी खरगोश न दौड़ा ।।

काँच सदा ही टूटा करते हैं पत्थर की चोटों से बस ,

जादूगर ही शीशे से दिखला सकता है फोड़ हथौड़ा ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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