सारी दुनिया में अमन चैन कैसे क़ायम हो ॥

घर किसी के न कभी भूले कोई मातम हो ॥

सोचता हूँ कि क्या उपाय करूँ मैं जिससे ,

सारे चेहरे खिलें ओ’ बाग़ बाग़ आलम हो ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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