( चित्र Google Search से साभार )

कभी कभी लगता है कभी भी आए न रात ॥

और कभी लगता है कभी ना होए प्रभात ॥ 

सब मन की पगलाहट माथे की है झक्क , 

कभी लगे अच्छी मैयत तो कभी बरात ॥ 

-डॉ.हीरालाल प्रजापति

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