कंस ना लंकेश जैसे कुनाम मुफ़्त यहाँ ।।

मिलते हैं कान्हा के साथ में राम मुफ़्त यहाँ ।।1।।

गर करोगे काम दिल से तो शर्तिया है मिले ,

सख़्त मेहनत का सिला इन्आम मुफ़्त यहाँ ।।2।।

मातहत हैं वो तेरे जो हैं बंदगी सी करें ,

वर्ना करता आज कौन सलाम मुफ़्त यहाँ ।।3।।

कौन मुँहमाँगी रखे तनख़्वाह पे नौकर ?

मिलते जब आसानियों से ग़ुलाम मुफ़्त यहाँ ।।4।।

जब न थी भरमार तब थे ये आम ; ख़ास बहुत ,

साथ में बिकते थे फ्रिज़ के भी आम मुफ़्त यहाँ ।।5।।

चाहता तुमको बनाना वो रिंदपेशा बड़ा ,

तब तो रोज़ाना पिलाता है जाम मुफ़्त यहाँ ।।6।।

( रिंदपेशा =अत्यंत शराबी /आम =साधारण /आम =एक फल )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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