( चित्र Google Search से साभार )

महबूबा महँगी हुई और बड़ी शौक़ीन ॥            

दिखने में अति श्याम पर स्वप्न सभी रंगीन ॥

आशिक़ फ़िर भी कर रहा हर फ़र्माइश पूर्ण ,

ख़ुद का चश्मा बेच उसे सौंप रहा दुर्बीन ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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