बेवफ़ा हो गई फ़िर भी तो लुभाती है मुझे ॥ 

कैसे कह दूँ न तेरी याद रुलाती है मुझे ॥ 

तुझसे नफ़रत करूँ बदला लूँ चाहूँ ख़ूब मगर ,

तेरी सूरत पे मोहब्बत चली आती है मुझे ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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