जो आ ही जाये लबों पर तो मुस्कुरा लेना ॥

कि सुनके तेरा फ़साना किसी को क्या लेना ॥

न इल्तिजा तू कर उसकी न जिसके हो क़ाबिल ,

मिले भी तो न ज़रूरत से कुछ सिवा लेना ॥

बुरा है यूँ भी किसी से उधारियाँ करना ,

मगर हाँ ! दोस्त से हरगिज़ भी क़र्ज़ ना लेना ॥

मिले न मुफ़्त में दुनिया  की कोई शै लेकिन ,

मिले कहीं न अगर प्यार तो चुरा लेना ॥

पड़े मिलें जो ख़ज़ाने तू चल दे ठुकराकर ,

गिरा मिले जो कहीं आदमी उठा लेना ॥

जो प्यार करता है तुझको किसी ग़रज़ के बिन ,

तू जान दे के भी मत उसकी बददुआ लेना ॥

 करना चाहे किसी को तू उम्र भर सिज्दा ,

शहीदे मुल्क़ की तुर्बत पे सर झुका लेना ॥

बुरा कोई भी करे काम तो ये करना ही ,

लगाना दर न भले पर्दा तो गिरा लेना ॥

( सिवा=से अधिक , तुर्बत=क़ब्र )

डॉ. हीरालाल प्रजापति

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