विवाहित हूँ मगर दिल से अभी तक चिर कुँवारा हूँ ।।

वलेकिन इश्क़-ओ-उल्फ़त को मैं पचपन का अठारा हूँ ।।

बुझाने से भड़क उठती है मेरी प्यास और उस पर ,

कहीं पानी नहीं मिलता गुटकते थूक हारा हूँ ।। 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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