देखने में सभ्य अंदर जंगली है आदमी ।।

 शेर चीते से ख़तरनाक और बली है आदमी ।।

जानवर प्रकृति का अपनी पूर्ण अनुपालन करें , 

अपने मन मस्तिष्क के कारण छली है आदमी ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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