हाँँ ! मुझसे बेपनाह मोहब्बत न करो तुम ।।

लेकिन ख़ुदा के वास्ते नफ़्रत न करो तुम ।।1।।

यों दुश्मनी निभाओ लड़ो , काट दो गर्दन ,

बस दिल को मेरे बारहा आहत न करो तुम ।।2।।

ख़िदमत में मेरी जान भी हाज़िर है , कभी भी

ईमान और दीन की चाहत न करो तुम ।।3।।

सच ख़ूब क़हर ढाओ कि ख़ुद्दार हूँ मुझ पर ,

एहसान की तो भूल के जुरअत न करो तुम ।।4।।

बस इतनी मेहरबानी करो मुझपे क़सम से ,

इतनी सी भी मेरे लिए ज़हमत न करो तुम ।।5।।

हूँ रीछ ज़ात मेरे घने बाल हैं लेकिन ,

भेड़ों के बदले मेरी हज़ामत न करो तुम ।।6।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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