पानी न पिऊँगा हो गर शराब सामने ॥

ताकूँ कनेर क्यों हो जब गुलाब सामने ॥

फाँकूँ मैं चने क्यों मैं चाटूँ बस अचार को ,

रक्खे हों तश्तरी में जब कबाब सामने ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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