आँखों को सुकूँ दे जो वही दीद , दीद है ।।

चंदन का बुरादा भी दिखे वर्ना लीद है ।।

जिस ईद मिले ग़म है मुहर्रम वो जश्न भी ,

जिस क़त्ल की रात आए ख़ुशी अपनी ईद है ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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