फ़क़ीरी में जो ख़ुश मत उसको धन-दौलत अता करना ॥

मोहब्बत के तलबगारों को मत नफ़्रत करना ॥

ख़ुदा क्या किसको लाज़िम है बख़ूबी जानता है तू ,

लिहाज़ा माँगने की मत मुझे नौबत अता करना ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *