मुक्तक : 134 – उसके दर्दे दिल की

उसके दर्दे दिल की मैं , दारू-दवा बनकर रहूँ ।। गर्मियों की लू में सच , बादे सबा बनकर रहूँ ।। यों मुझे देता है बस , तक़्लीफ़ पे तक़्लीफ़ वो , बस मेरा है इसलिए , उसका मज़ा बनकर रहूँ...Read more

मुक्तक : 133 – मैं कब दीद के क़ाबिल

मैं कब दीद के क़ाबिल फ़िर भी तकते मुझे रहो !! क्यों करते हो मुझे तुम इतना ज़्यादा प्यार कहो ? मेरे रूप-रंग पर भूले भी जो पड़े नज़र , दुनिया करती है छिः छिः तुम वा-वा अहो-अहो !! -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 132 – भूखे को मत दिखाकर

भूखे को मत दिखाकर खा तू क़बाब को ।।  मैकश हूँ सामने मत ला तू शराब को ।। मत इम्तहाँ ले मेरे सब्र-ओ-क़रार का , पर्दे में रख छुपाकर अपने शबाब को ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

गीत : 4 – दिल की दिल में

दिल की दिल में न रख ज़ुबाँ पर लाइए ॥ प्यार करते हों तो प्यार जतलाइए ॥ दिल की दिल………………………….. चोरी चोरी उन्हें कब तलक देखिए , हाले दिल की ख़बर ख़त में लिख भेजिए , यूँ न शर्माइए , यूँ न घबराइए ॥...Read more

गीत : 3 – इश्क़ करता हूँ

इश्क़ करता हूँ मैं , प्यार करता हूँ मैं ॥ उनसे कैसे कहूँ उनपे मरता हूँ मैं ? इश्क़ करता……………………………….. खिलते चेहरे से कुछ भी पता न चले , दर्दे दिल कोई कैसे मेरा जानले ? अपने यारों से भी कुछ न कहता हूँ मैं...Read more

मुक्तक : 131 – भूख जिसकी भी

भूख जिसकी भी लगे उसको मैं खाकर के रहूँ ।। चाहता हूँ जो उसे हर हाल पाकर के रहूँ ।। अब इसे ज़िद कहिए , कहिए ख़ब्त या मंज़िल की धुन , पाँव कट जाएँ तो मैं सिर को चलाकर के रहूँ ।।...Read more