हवा को , पानी को मुट्ठी में बंद कर लेना ,

या उँचे-उँचे पहाड़ अपने सर पे धर लेना ,

सरल है मुझको ये फूलों को सूँघने जैसे –

कठिन लगे है बहुत उनके मन को हर लेना !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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