( चित्र Google Search से साभार )

हर वक़्त अपने साथ रखूँगा शराब को ।।

चूमूँगा-सूँघूँगा…….न चखूँगा शराब को ।।

पी-पी के ख़ुद ही अपना जिगर फूँका है मैंने ,

मैं हूँ ग़लत…ग़लत न कहूँगा शराब को ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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