हर काम के लिए तो , तैयार हम रहे रे ।।

फ़िर भी तो मुद्दतों तक , बेकार हम रहे रे ।।1।।

वो चुस्ती-फुर्ती-ताक़त , अब हममें न बची क्यों ?

मुद्दत तक अस्पताली , बीमार हम रहे रे ।।2।।

लड़ने दिया न जब तक , दम में था दम उन्हें सच ,

दोनों के बीच चीनी – दीवार हम रहे रे ।।3।।

मिलते थे जिससे पुल वो , कल रात ढह गया था ,

उस पार रह गए वो , इस पार हम रहे रे ।।4।।

सदबार इश्क़ हमने , था आज़माया लेकिन ,

नाकाम इक दफ़्आ क्या , हर बार हम रहे रे ।।5।।

उसने गुनाह सारे , जब बख़्श ही दिए तो ,

ताउम्र उसके आगे , झुक यार हम रहे रे ।।6।।

वो थे हमें कुछ ऐसे , मछली को जैसे नदिया ,

उनके लिए कभी कब , दरकार हम रहे रे ।।7।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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