( चित्र Google Search से साभार )

इंसान ही न तड़पे महब्बत को बेशुमार ।।

सब जानवर-परिंदे भी उल्फ़त के हैं शिकार ।।

जितना अहम है ज़ीस्त में रूहानी इश्क़ दोस्त ,

उससे तुनक भी कम न ज़रुरी हो तन का प्यार ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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