( चित्र Google Search से साभार )

डर है कि टूट जाये मेरी खोपड़ी न आज ।।

किसने चलाया ये अजीब अटपटा रिवाज़ ?

हों बंद इस तरह की बेतुकी परम्पराएँ ,

रखिये वो अनवरत कि जिनपे आपको हो नाज़ ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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