धूप से तो कभी लोहा गलता नहीं ।।

ग्लेशियर सर्दियों में पिघलता नहीं ।।

वो यक़ीनन बुरी तरह बेहोश था ,

उठके मुर्दा ज़मीं पर टहलता नहीं ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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