मुफ़्त मिले तो पीलूँ दारू भी मटका भर-भर कर ।।

गर ख़रीद पीना हो पानी तो न पिऊँ चुल्लू भर ।।

डॉलर-पौंड कमाऊँ ख़र्चा करूँ न इक रुपया भी ,

कपड़ा मिल का मालिक हूँ पर रहता हूँ मैं दिगंबर ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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