छोटे-बड़े सब इंसानों के , अपने सपने होते हैं ।।

रहते ज़ियादातर के अधूरे , कुछ के ही पूरे होते हैं ।।1।।

जो दिखता है बस उसकी ही , वाह किया करती दुनिया ,

सिर्फ़ कलश की बात हो याँ कब , नींव के चर्चे होते हैं ।।2।।

हमने तो अब उनमें भी तहजीब नदारद ही देखी ,

जो ऊँचे-ऊँचे मशहूर , घराने वाले होते हैं ।।3।।

मंदिर और मज़ार सड़क के , ठीक किनारे होने से ,

कई टकराव चलाते वाहन , शीश नवाते होते हैं ।।4।।

पहले वो सिंदूरी पत्थर , कायम करते एक जगह ,

फिर यूँ ही इक-इक जा उनके , बेजा कब्ज़े होते हैं ।।5।।

कुछ लंगूर परी रू बीवी , के होते तो हैं मालिक ,

पर जैसे वो उसके चौक़ीदार सरीख़े होते हैं ।।6।।

आज अभी हो जाने वाले , टलते हफ़्ते-महीनों पे ,

वक़्त पे काम कहाँ सरकारी , आसानी से होते हैं ।।7।।

मज़्दूरों के ख़ून की क़ीमत , होती है पानी जैसी ,

नामावर लोगों के पसीने , इत्र से महँगे होते हैं ।।8।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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