गिरा नज़रों से भी हूँ और दिल का भी निकाला हूँ ।।

यक़ीनन हूँ बुझा सूरज पिघलता बर्फ काला हूँ ।।

समझते हैं जो ऐसा आज वो कल जान जाएँगे ,

मैं तल का मैकदा हूँ या हिमालय का शिवाला हूँ ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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