मैं कब दीद के क़ाबिल फ़िर भी तकते मुझे रहो !!

क्यों करते हो मुझे तुम इतना ज़्यादा प्यार कहो ?

मेरे रूप-रंग पर भूले भी जो पड़े नज़र ,

दुनिया करती है छिः छिः तुम वा-वा अहो-अहो !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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