तुझपे अपने लुत्फ़ चुन-चुनकर लुटाऊँगा सभी ।।

तेरे ग़म सर पर अकेले ही उठाऊँँगा सभी ।।1।।

अपनी सूरत से बुरी सूरत नहींं देखी मगर ,

आईने हरगिज़ न दुनिया के हटाऊँँगा सभी ।।2।।

तूने कर ली ग़ैर से शादी न डर आशिक़ हूँ मैं ,

तेरी ख़्वाहिश है तो तेरे ख़त जलाऊँँगा सभी ।।3।।

हूँ बहुत दुश्नाम अब सरनाम होने के लिए ,

दाग़ माथे के मैं मिटकर भी मिटाऊँँगा सभी ।।4।।

छोड़ दे तू पूछना मैं वक़्त पर खुद ही तुझे ,

कुछ न छोडूँँगा वो बातें भी बताऊँँगा सभी ।।5।।

तूने माना है तहेदिल से मुझे उस्ताद तो ,

मैं भी जो कुछ जानता हूँ वो सिखाऊँँगा सभी ।।6।।

तू न बेजा फ़ायदा आज़ादियों का ले अगर ,

बंदिशें तुझ पर लगीं फ़ौरन हटाऊँँगा सभी ।।7।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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