( चित्र Google Search से साभार )          

हैरत अंगेज़ ज़बरदस्त खुलासा होते ।।         

हमने देखा है उधर रोज़ तमाशा होते ।।

तिल को देखा खजूर-ताड़ सा ऊँचा उठते ,

और पर्वत को सिकुड़ राई-रवा सा होते ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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