ना लिखें मौलिक न कुछ रचनात्मक रोचक ॥

जिनको देखो बन रहे गंभीर आलोचक ॥

दूसरों को तो दिखाते फिरते आईने ,

ख़ुद की गौरिल्लाओं सी सूरत करे भौचक ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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