छूने से तेरा छुइमुई जैसा ही सिमट जाना ॥ 

इसरार पे शजर की बेलों सा लिपट जाना ॥

तेरी इन्हीं अदाओं पे रोज़ हो मेरा यों ,

ज्यों शम्अ पे शरारे का जल हो निपट जाना ॥ 

डॉ. हीरालाल प्रजापति

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