जितना खट्टी कैरियों का मीठे साँटों का लगा ॥

प्यार में चुंबन के सँग औचित्य चाँटों का लगा ॥

गौर मुख पर श्याम तिल जैसे लगाता चाँद चौ ,

पुष्प उद्यानों में यों अस्तित्व काँटों का लगा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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