एहसास मेरे मर हैं चुके अब तो इस क़दर ॥

बर्फ़ीली हवाओं का न अब लू का हो असर ॥

लगता न कहीं पर भी बिना उसके दिल मेरा ,

जंगल हो मरुस्थल हो कि फिर हो कोई शहर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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