सब रामत्व विहीन मारने रावण आए ॥

रक्तबीज सा वह क्यों ना पुनि-पुनि जी जाए ॥

सचमुच हो जो रावण के वध का अभिलाषी ,

सर्वप्रथम वह स्वयं को  पूरा राम बनाए ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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