मैंने तेरी नाचती तस्वीर देखी है ॥

दिल में सर ऊँचा उठाती पीर देखी है ॥

वन में जैसे क़ैस ने देखा हो लैला को ,

राँझना ने मानो मरु में हीर देखी है ॥

( क़ैस=मजनूँ , मरु=रेगिस्तान )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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