ग़मी में एक दिन खुशियाँ , मनाने का चलन होगा ।।

उजालों के लिए शम्मा , बुझाने का चलन होगा ।।1।।

किया करते हैं हम जिस तरह से बर्बाद पानी को ,

कि इक दिन इक महीने में , नहाने का चलन होगा ।।2।।

यूँ ही मरती रहीं गर पेट में ही लड़कियाँ इक दिन ,

कई लड़कों से इक लड़की , बिहाने का चलन होगा ।।3।।

इसी तादाद में खाता रहा गर जानवर इंसाँ ,

किसी दिन आदमी के गोश्त , खाने का चलन होगा ।।4।।

जो रातों रात दौलत मंद अगर सब बनना चाहेंगे ,

तो नंबर दो से ही पैसा , कमाने का चलन होगा ।।5।।

तरक़्क़ी में अगर आड़े ज़मीर आता रहे जब-तब ,

तो इस बेदार रोड़े को , सुलाने का चलन होगा ।।6।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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