की है भलाई या इक अच्छी बुराई कर दी ।।

गेहूँ से घुन अलग था जिसकी पिसाई कर दी ।।

वो कर रहा ज़बरदस्ती साथ में था उसके ,

बदले में हमने उसको उसकी लुगाई कर दी ।।

अफ़्वाह से उठे इक तूफ़ान ने जहाँ में ,

इज्ज़त जो थी हिमालय उनकी वो राई कर दी ।।

लेकर उधार चाहा था खीर ही बनाना ,

आकर किसी ने उसमें नीबू-खटाई कर दी ।।

पहले था ख़ूँ के रिश्तों का कुछ लिहाज़ अदब अब ,

बच्चों ने माँ-पिताजी की भी पिटाई कर दी ।।

माँगी न ग़ैर को दे जो इक तवील मुद्दत ,

हमने वो चीज़ अपनी ऐसे पराई कर दी ।।

पिंजरे से इक परिंदे के भागने पर उसको ,

पहले तो पकड़ा फिर पर काटे रिहाई कर दी ।।

जब ओढ़ने को सर्दी में मिल सका न कुछ तो ,

घुटनों को अपने तन की कम्बल-रजाई कर दी ।।

था एक जनवरी को आने का उनका वादा ,

लेकिन उन्होंने आते-आते जुलाई कर दी ।।

भरने को पेट अपना सब बेचकर किताबें ,

बचपन में बंद हमने अपनी पढ़ाई कर दी ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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