मतलब इतना ही ज़िंदगानी का ?

सिर्फ़ इक बुलबुला वो पानी का ।।

फ़िर भी सबमें ग़ुरूर छलके है ,

दौलत-ओ-शुह्रत-ओ-जवानी का !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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