उत्कृष्टता पर आजकल , निकृष्ट लिखते हैं ।।

निकृष्ट के चारित्र्य फिर , उत्कृष्ट लिखते हैं ।।

जो साधु को शैतान दुष्टों को मसीहा सम ,

बिलकुल अनावश्यक को पल-पल इष्ट लिखते हैं ।।

डॉ. हीरालाल प्रजापति

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