लाख खूँ ख़्वार हो शैतान हो वली समझे ॥

दोस्त वो है जो अपने दोस्त को सही समझे ॥

दोस्त का चिथड़ा चिथड़ा दूध भी तहे दिल से ,

रबड़ी छैना बिरज का मथुरा का दही समझे ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *