जिन्हें सपनों में भी ना पा सकें उन पर ही मरते हैं !!

न जाने कैसी-कैसी कल्पनाएँ लोग करते हैं ?

चकोरों को पता है मिल नहीं सकता उन्हें चंदा ,

वे फिर भी उसको निश भर तक निरंतर आह भरते हैं !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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