टोपी , बंडी , कुर्ता क्या है ? पाजामें फटवा दूँगा ॥

संसद से हर गली सड़क तक हंगामें मचवा दूँगा ॥

मैं मतदाता हूँ विवेक से वोट अगर देने चल दूँ ,

कितने ही कुर्सी-सिंहासन उलट पलट करवा दूँगा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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