इतना कम क़ीमत हुआ है मेरे भइया ॥

ये करारा ख़ूबसूरत इक रुपइया ॥

एक दर्जन भर रुपये से कम कहीं भी ,

दो न जब तक फ़ुल नहीं मिलती है चइया ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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