पहले थी जो ईद सी घट कर मोहर्रम हो गई ॥

शिक्षकों की दिन–ब-दिन इज्ज़त बहुत कम हो गई ॥

मानते थे पहले गुरु को लोग मानिन्दे ख़ुदा ,

अब वो श्रद्धा-आस्था जाने कहाँ गुम हो गई ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

 

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