( चित्र Google Search से साभार )

हँस-हँसके उसने कितनी बार आँख चार की ?

चाबी मगर न भूलकर दी दिल के द्वार की !!

माँगा कुछ उसने तोहफे में था न हमने ख़ुद ,

अपनी ये ज़िंदगानी उसके नाम यार की ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

 

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